किताब अल मोतमादुल मुस्तन्द पर हरामैंन तैय्याबैं

*आला_हज़रत (रहमतुल्लाह'अलैह)* की किताब अल मोतमादुल मुस्तन्द पर हरामैंन तैय्याबैं (मक्का'शरीफ और मदीना"शरीफ) के 35 मुफ्तियाने'किराम ने *📚 किताब हुस्सामुल हरामैंन"📚 में (सन'1905)* में *देवबंद " वहाबी" अहले_हदीस " कादियानी" नेचरी"* को (इनके अक़ीदे की बुनियाद पर) काफ़िर लिखा है और जो इनके कुफ्र में शक़ करे वो भी काफिर है"
 और इसकी तसदीक़ (सच्चा होना) उस दौर में हिन्दोस्तान के 275'उल्मा ने की के ये बात हक़ है"
इसको भी सुने"👇👇
https://youtu.be/chWE1_XbKzU

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Hazrat Musa Ka Hajj Karna Aur Huzoor ﷺ Ka dekhna nabi ki intaqal ke baad ki zindagi

حضور ﷺ تو ہزاروں سال پہلے مرنے والے کو بھی دیکھتے ہیں ورنہ آیات میں دیکھنے کے بجائے جاننے کے الفاظ ہوتے