*तरावीह 20 रकाअत या 8*
*तरावीह 20 रकाअत या 8* *रमज़ानुल मुबारक* *___________________* *_तरावीह चारों इमामों के नज़दीक 20 रकाअत है जबकि गैर मुक़ल्लिद जो अपने आप को अहले हदीस कहता है लेकिन दर हकीकत वह अहले हदीस कहलाने के क़ाबिल नहीं वो सिर्फ 8 रकाअत ही तरावीह पढ़ता है बुखारी शरीफ़ की जिस 11 रकाअत की रिवायत को गैर मुक़ल्लिदीन 8 रकाअत तरावीह के लिए पेश करता है वो दर अस्ल तरावीह नहीं बल्कि 8 रकाअत तहज्जुद और 3 रकाअत वित्र है और हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से ये 11 रकाअत पूरी ज़िन्दगी में साबित है क्योंकि आप पर तहज्जुद भी फर्ज़ थी,जैसा कि उम्मुल मोमेनीन सय्यदना आइशा सिद्दीक़ा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा फरमाती हैं कि_* *_हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम रमज़ान और ग़ैर रमज़ान में 11 रकाअत से ज़्यादा अदा नहीं फरमाते थे_* *📕 बुखारी,जिल्द 1,सफह 154* *📕 मुस्लिम,जिल्द 1,सफह 254* *ज़रा गौर करें इस हदीसे पाक से साफ़ ज़ाहिर होता है कि अगर ये 8 रकाअत तरावीह़ की पढ़ी जा रही थी तो ग़ैर रमज़ान में तरावीह तो है नहीं फिर क्यों हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ग़ैर रमज़ान में भी 8 रकात तरावीह़ पढ़ रहे हैं तो मानना ...