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Showing posts from March, 2023

*तरावीह 20 रकाअत या 8*

*तरावीह 20 रकाअत या 8* *रमज़ानुल मुबारक* *___________________* *_तरावीह चारों इमामों के नज़दीक 20 रकाअत है जबकि गैर मुक़ल्लिद जो अपने आप को अहले हदीस कहता है लेकिन दर हकीकत वह अहले हदीस कहलाने के क़ाबिल नहीं वो  सिर्फ 8 रकाअत ही तरावीह पढ़ता है बुखारी शरीफ़ की जिस 11 रकाअत की रिवायत को गैर मुक़ल्लिदीन 8 रकाअत तरावीह के लिए पेश करता है वो दर अस्ल तरावीह नहीं बल्कि 8 रकाअत तहज्जुद और 3 रकाअत वित्र है और हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से ये 11 रकाअत पूरी ज़िन्दगी में साबित है क्योंकि आप पर तहज्जुद भी फर्ज़ थी,जैसा कि उम्मुल मोमेनीन सय्यदना आइशा सिद्दीक़ा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा फरमाती हैं कि_* *_हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम रमज़ान और ग़ैर रमज़ान में 11 रकाअत से ज़्यादा अदा नहीं फरमाते थे_* *📕 बुखारी,जिल्द 1,सफह 154* *📕 मुस्लिम,जिल्द 1,सफह 254* *ज़रा गौर करें इस हदीसे पाक से साफ़ ज़ाहिर होता है कि अगर ये 8 रकाअत तरावीह़ की पढ़ी जा रही थी तो ग़ैर रमज़ान में तरावीह तो है नहीं फिर क्यों हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ग़ैर रमज़ान में भी 8 रकात तरावीह़ पढ़ रहे हैं तो मानना ...

سوال میں یہ مانتا ہوں کہ ایک مٹھی داڑھی رکھنا افضل ہے، لیکن مجھے ایسی احادیث کا حوالہ دے دیں کہ جس میں ایک مٹھی سے کم داڑھی کو "حرام اور گناہ کبیرہ" قرار دیا گیا ہو!*

سوال میں یہ مانتا ہوں کہ ایک مٹھی داڑھی رکھنا افضل ہے، لیکن مجھے ایسی احادیث کا حوالہ دے دیں کہ جس میں ایک مٹھی سے کم داڑھی کو "حرام اور گناہ کبیرہ" قرار دیا گیا ہو!* *جواب* ایک مشت سے کم داڑھی رکھنے کے ناجائز ہونے کی دلیل جس عمل پر حضور ﷺ نے ناراضگی کا اظہار کیا ہو اس کو چھوڑنا واجب ہوتا ہیں داڑھی کو بڑھانے کا حکم تو حدیث میں ہیں کتنی داڑھی کو بڑھانا ہے یہ صحابی کے عمل سے ثابت ہے جو یہ کہے حضور ﷺ نے داڑھی رکھنے مقدار نہیں بتائیں یہ اپنے نبی کے لئے بدگمانی ہیں صحابہ کا عمل حضور ﷺ کا حکم ہی ہوتا ہیں داڑھی تمام انبیاءِ کرام علیہم الصلوات والتسلیمات کی سنت، مسلمانوں کا قومی شعار اور مرد کی فطری اور طبعی چیزوں میں سے ہے، اسی لیے رسول اللہ ﷺ نے اس شعار کو اپنانے کا اپنی امت کو حکم دیا ہے، اس لیے جمہور علماءِ امت کے نزدیک ایک مشت داڑھی رکھنا واجب اور اس کو کترواکریا منڈوا کر ایک مشت سےکم کرنا حرام اور کبیرہ گناہ ہے اور اس کا مرتکب فاسق اور گناہ گار ہے۔ ایک ہے نفسِ داڑھی کا ثبوت ، یہ حکم کئی احادیث سے ثابت ہے ، اور خلاف ورزی کی ممانعت بھی صراحتاً موجود ہے۔اور دوسری چیز ہ...

Darhi Munde Shehar Badar ( Social Bycott)*

Darhi Munde Shehar Badar ( Social Bycott)* Ibne Kaseer Damishqi Ne Likha Hai Ke 176 Main Damishq Main Qalandariya Firqa Ke Kuch Logon Ne Darhiyan Mundwayin To Us Waqt Ke Badhshah E Islam Sultaan Hasan Bin Muhammad Ne Hukm Diya Ke Unko Mulk Badr Kar Diya Jaye Aur Us Waqt Tak Unko Islami Sheharon Main Dakhil Na Hone Diya Jaye Jab Tak Ke Wo Is Kafirana Shiaar Se Tauba Na Kar Lein. *البدایۃ والنھایۃ جلد 14* *داڑھی سنت رسول ﷺ کی اھمیت ص 11*

✨क्या दाढ़ी सिर्फ सुन्नत है❓*_

_*✨क्या दाढ़ी सिर्फ सुन्नत है❓*_ _*✒️अवाम मे ये मशहूर है कि दाढ़ी सिर्फ सुन्नत है, न रखने पर गुनाह नही होगा अस्ल मे ये इनकी कम फहमी है और कुछ हद तक हमारे मुकर्रीर हज़रात की भी गलती है कि अपनी तक़रीरों मे दाढी सुन्नत है, दाढी सुन्नत है इस तरह की बाते करते हैं।*_ _*✒️कुछ हजरात दिमाग का घोडा दौडाते है और कहते हैं की दाढ़ी सुन्नते मोअक्केदा है।ये दोनो बात गलत है। देखीए सुन्नत का लुगवी माना होता है तरीक़ा, दाढ़ी हुजूर ﷺ की सुन्नत है मतलब आप ﷺ का तरीक़ा है, मर्तबे में सुन्नत नही, मर्तबे में ये वाजिब यानी फर्ज के क़रीब है, कुछ हवाले दर्जे जैल हैं।👇*_ _*तमाम सुन्नतों में दाढ़ी 1 मुश्त तक बढ़ाने की सुन्नत इतनी क़वी है कि उल्माये किराम इसको वाजिब कहते हैं।*_ *📕اشعۃاللمعات, جلد 1 ،صفحہ 212* _*✒️दाढ़ी जबकि 1 मुश्त से कम हो तो उसे काटना किसी इमाम यानि हनफी, शाफई, मालिकी व हम्बली के नज़दीक जायज़ नहीं है और पूरी तरह से मूंड देना तो मुखन्नस यानि हिजड़ों का और हिंदुस्तान के यहूदी और ईरान के मजूसियों का तरीक़ा है।*_ *📕رد المحتار، جلد 2 ، صفحہ116* *📕فتح القدير، جلد 2 ،صفحہ 270* *📕الطحطاوی صفحہ411* *📕البحْ...

किताब अल मोतमादुल मुस्तन्द पर हरामैंन तैय्याबैं

*आला_हज़रत (रहमतुल्लाह'अलैह)* की किताब अल मोतमादुल मुस्तन्द पर हरामैंन तैय्याबैं (मक्का'शरीफ और मदीना"शरीफ) के 35 मुफ्तियाने'किराम ने *📚 किताब हुस्सामुल हरामैंन"📚 में (सन'1905)* में *देवबंद " वहाबी" अहले_हदीस " कादियानी" नेचरी"* को (इनके अक़ीदे की बुनियाद पर) काफ़िर लिखा है और जो इनके कुफ्र में शक़ करे वो भी काफिर है"  और इसकी तसदीक़ (सच्चा होना) उस दौर में हिन्दोस्तान के 275'उल्मा ने की के ये बात हक़ है" इसको भी सुने"👇👇 https://youtu.be/chWE1_XbKzU