मे'राज के ऐतराज़ पर जवाब

*मे'राज के ऐतराज़ पर जवाब...* 🗓️ *पार्ट-२* 📝 *अय मुन्किरो❗ अक़्ल से फैसला करने वालो ❗तुम्हारी अक़्ल के परखच्चे उड़ जायेंगे❗अगर एक (१) महीने का सफर एक आन में हो सकता है ,बल्कि हुआ है क़ुर्आन शाहिद है तो फिर सत्ताईस (२७) साल का सफर भी एक आन में हो सकता है अगर ये मुमकिन है तो वो भी मुमकिन है , इसके अलावा तीन ( ३ ) और दलील है कि .... 💚 हुज़ूर ﷺ को मेअराज हुई और जिस्म ऐ अतहरके साथ हुई...*
🌟 *अल्लाह तबारक व त'आला इस आयत में फरमाता है कि ...* *"अपने बन्दे को ले गया❗तो बन्दा किसको कहते हैं , इस पर इमाम फ़खरूद्दीन राज़ी अलैहिर्रहमा फरमाते हैं कि...*
 *"अब्द का इतलाक़ रूह और जिस्म दोनों पर होता है... "*
📚 *मफातीहुल ग़ैब , जिल्द - २० , सफह - २९५*
✅ *अय 🅰️ आशीकाने रसुल❗इसकी सराहत खुद क़ुर्आन ऐ मुक़द्दस में मौजूद है, अल्लाह तबारक व तआला फरमाता है...*
🌹 *क्या तुमने नहीं देखा❗ जिसने मेरे बन्दे को नमाज़ से रोका❗*
📚 *अल-कुरान-पारा ३० ,सूरह अलक़, आयत/९* 🌹 *और ये कि जब अल्लाह का बंदा उसकी बंदगी करने को खड़ा हुआ, तो क़रीब था कि वो जिन्न उस पर ठठ्ठा की ठट्ठा हो जायें...*
📚 *अल-कुरान-पारा २७ ,सूरह जिन्न,आयत/१९* 🔥 *मेरा सवाल उन मुन्किरोंसे हैं बताइये... नमाज़ रूह पढ़ती है या जिस्म❓ या कि दोनों❓ज़ाहिर सी बात है की दोनों❗तो मे'अराज में भी हुज़ूर ﷺ का जिस्म मुबारक और रूह मुबारक दोनों ही मौजूद थी...*
                                                 ✅ *अय 🅰️ आशीकाने रसुल❗सारी दुनिया जानती है कि शबे मे'अराज में हुज़ूर ﷺ के लिए बुर्राक़ लाया गया, अगर मे'अराज रूह की थी तो बुर्राक़ का क्या काम❓क्या बुर्राक़ रूह को उठाने के लिए लाया गया था❓*
💥 *अगर हुज़ूर ﷺ को मे'अराज ख्वाब में होती तो ❗मुनकिर इन्कार क्यों करता❓( ये वो मुन्किर जो अबु जहल और कुफ्फा़र ऐ कुरैश थे) क्योंकि ख्वाब में आसमान की सैर करना कोई कमाल तो नहीं❗ मतलब ये हुआ कि मे'अराज जिस्म के साथ ही हुई थी ...*
📚 *तफ़सीरे रुहुल बयान, ( पारा-१५ ) सफह - ८*
💚 *सरवर ऐ दो जहाँ मालिक ऐ कौनो-मकां ,मेअराज के दूल्हा हुज़ूर ﷺ ने खुदा ऐ वा-दहु ला-शरीक़ का मुकद्दस माथे की मुकद्दस आँख मुबारक से दीदार किया...* 
 🌹 *आँख मुबारक ना किसी तरफ फिरी और ना-हद से बढ़ी...* 
📚 *अल-कुरान-पारा २७ ,सूरह नज्म, आयत/१७* 
✅ *अय 🅰आशीकाने रसुल ❗ईसका मतलब ये कि ... शबे मेअराज प्यारे आकाॅ हुज़ूर ﷺ ने अपने रब को अपने सर की आंखों से देखा,उसी देखने को खूद अल्लाह तबारक व त'आला अपनी मुकद्दस किताब में फरमाता है कि...* *ना-तो देखने में ही आंख फेरी और ना-ही बेहोश हुए.... जैसा कि हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम अल्लाह तबारक व तआला के जलवों की ताब ना-ला सके और बेहोश हो गए, और इस देखने की तफसील खुद हुज़ूर ﷺ इस तरह इरशाद फरमाते हैं...*
🌹 *इज़्ज़त वाला जब्बार यहां तक क़रीब हुआ कि दो (२) कमानों या उससे भी कम फासला रह गया ...*
📚 *बुखारी, जिल्द २,सफह-११२०*      

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