कुरआन का गलत तर्जमा किया

*"मुसलमानो! हक पहचानो!"*_                          _*🔖पोस्ट नम्बर 18*_   
    _*📗कुरआन का गलत तर्जमा किया 📗*_ 
                       _*देवबंदियों ने*_
_*✒️एक जुबान से दूसरी जुबान में तर्जमा करना मामूली काम है लेकिन किसी जुबान की फसाहत व बलागत, सलासत व मानवीयत, मुहावरे, अंदाजे खिताब और शब्दों के अर्थ में हुए बदलावों को समझना फिर तर्जमा करना उतना ही मुश्किल काम है।*_ 
_*✒️आइए इसे एक छोटे से उदाहरण से समझें- फारसी भाषा में किसी आदमी को "मेहतर" कहना उसकी इज्जत बढ़ाना है क्योंकि फारसी भाषा में इसका अर्थ है "सरदार" लेकिन यही इज्जत वाला शब्द हमारे यहाँ गाली है।*_
_*🔥लेकिन आज देवबंद के मौलानाओं ने कुरआन का जो तर्जमा किया उसमें ढेरों गलतियाँ हैं कि जिससे अर्थ का अनर्थ हो गया।*_ 
_*🔥देवबंदियों के तर्जमे अल्लाह और उसके रसूल की तौहीन से भरे पड़े हैं। देवबंदियों ने ऐसे तर्जमे किये कि जिसकी वजह से हराम चीज़ हलाल हो गई और हलाल चीज़ हराम हो गई।*_ 
_*🔥देवबंदियों ने कुछ तर्जमों में ऐसी गलतियाँ भी कर दी कि अगर उस पर यकीन कर लिया जाए तो आदमी काफिर मुर्तद हो जाए। इस किस्म का तर्जमा करके वो खुद गुमराह होते हैं और दूसरों को भी गुमराह करते हैं।*_
_*✒️फिर जब हम आलाहज़रत इमाम अहमद रज़ा का तर्जमा "कंजुल ईमान" देखते हैं तो एक भी गलती नही पाते। नीचे देवबंदियों और आला हज़रत के कुछ तर्जमों को एक साथ पेश किया जा रहा है। कारेईन आप खुद इंसाफ करें कि कौन सही है।👇*_
_*📖पारा-4, सूरह अल-इमरान, आयत-142*_
_*❌ तर्जमा:- हालांकि अभी खुदा ने तुम में से जिहाद करने वालों को तो अच्छी तरह मालूम किया ही नहीं।*_
_(फतेह मुहम्मद जालन्धरी देवबंदी)_
_*❌ तर्जमा:- हालांकि अभी अल्लाह ने उन लोगों को तुम में से जाना ही नहीं जिन्होंने जिहाद किया।*_
_(अब्दुल माजिद दरियाबादी देवबंदी)_
_*❌ तर्जमा:- हालांकि अल्लाह तआला ने उन लोगों को तो देखा ही नहीं जिन्होंने तुम में से जिहाद किया हो।*_
_(अशरफ अली थानवी देवबंदी)_
_*✅ तर्जमा:- और अभी अल्लाह ने तुम्हारे गाज़ियों का इम्तिहान न लिया।*_
_(आला हज़रत)_
_*⚠️नोट- अल्लाह तआला जो आलिमुल गैब है। लेकिन देवबंदियों के इस तर्ज पर यकीन करें तो अल्लाह को मालूम ही नहीं कि मोमिनों में से कौन लोग जिहाद करेंगे। (माअजल्लाह)*_
_*📖पारा-26, सूरह अल-फतह, आयत-1*_
_*❌तर्जमा:- बेशक हमने आप को एक खुल्लम खुल्ला फतह दी ताकि अल्लाह आपकी सब अगली पिछली खताऐं माफ कर दे।*_
_(अब्दुल माजिद दरियाबादी देवबंदी)_
_*❌तर्जमा:- हमने तुम्हारी खुल्लम खुल्ला फतह करा दी ताकि तुम इस फतह के शुक्रिया में दीने हक कि तरक्की के लिए और ज़्यादा कोशिश करो और खुदा उसके सिला में तुम्हारे अगले और पिछले गुनाह माफ कर दे।*_
_(डिप्टी नज़ीर अहमद देवबंदी)_
_*✅ तर्जमा:- बेशक हमने तुम्हारे लिए रौशन फतह दी ताकि अल्लाह तुम्हारे सबब से गुनाह बख़्शे, तुम्हारे अगलों के और तुम्हारे पिछलों के।*_
_(आला हजरत)_
_*⚠️नोट- ऐ मुसलमानो बताओ कि हुजूर मासूमों के सरदार या गुनहगार? आपको यह तो मालूम ही होगा कि नबी और फरिश्ते मासूम होते हैं उनसे गुनाह हो ही नहीं सकता, मगर इन जाहिल देवबंदियों के तर्जमों के हिसाब से नबी गुनहगार और गुमराह हैं। अब जरा आलाहज़रत का तर्जमा देखिए कि अल्लाह अपने महबूब के सदके तुफैल में हम गुनहगार मुसलमानो को बख्श देगा।*_
_*📖पारा-9, सूरह इंफाल, आयत-30*_
_*❌तर्जमा:- और वह भी दाँव करते थे और अल्लाह भी दाँव करता था और अल्लाह का दाँव सबसे बेहतर है।*_
_(महमूदुल हसन देवबंदी)_
_*❌ तर्जमा:- और मकर करते थे वह और मकर करता था अल्लाह तआला और अल्लाह तआला नेक मकर करने वालों का है।*__(शाह रफी उद्दीन)_
_*❌तर्जमा:- और वह तो अपनी तदबीर कर रहे थे और अल्लाह मियाँ अपनी तदबीर कर रहे थे और सबसे ज्यादा मुस्तहकम तदबीर वाला अल्लाह है।*_
_(अशरफ अली थानवी देवबंदी)_
_*✅ तर्जमा:- और वह अपना सा मकर करते थे और अल्लाह अपनी खुफिया तदबीर फरमाता था और अल्लाह की खुफिया तदबीर सबसे बेहतर।*_
_(आलाहजरत)_
_*⚠️नोट- अल्लाह तआला को मक्र (मक्कार) और फरेब (धोखा) की तरफ निस्बत करना उसकी शान में खुली गुस्ताखी है। ये एक बुनियादी गलती है और अशरफ अली थानवी ने अल्लाह पाक लिखने के बजाय अल्लाह मियाँ लिख डाला जो कि गलत है, क्योंकि मियाँ के तीन मआने हैं मालिक, शौहर और ज़िना का दलाल और थानवी ने मियाँ कहकर अल्लाह को आम इन्सानों के बराबर ला खड़ा किया। जबकि आला हज़रत ने मजकूरा आयत में "मकर" का तर्जमा तफासीर की रौशनी में किया है खुफिया तदबीर और लफ्ज “मकर" को पहले मकाम पर तर्जमा में काफिरों की तरफ मन्सूब कर दिया।*_
_*📖पारा-5, सूरह निसा, आयत-142*_
_*❌ तर्जमा:- खुदा उन्ही को धोखा दे रहा है।*__(डिप्टी नज़ीर अहमद देवबंदी)_
_*❌ तर्जमा:- अल्लाह उन्हीं को धोखे में डालने वाला है।*_
_(फतेह मोहम्मद जालंधरी देवबंदी)_
_*❌ तर्जमा:- मुनाफेकीन दगा बाज़ी करते हैं अल्लाह से और अल्लाह भी उनको दगा देगा।*_ _(आशिक इलाही मेरठी और महमूदुल हसन देवबंदी)_
_*✅ तर्जमा:- बेशक मुनाफिक लोग अपने गुमान में अल्लाह को फरेब देना चाहते हैं और वही उनको गाफिल करके मारेगा।*_
_(आलाहज़रत)_
_*📖पारा-11, सूरह यूनुस, आयत-21*_
_*❌ तर्जमा:- कह दो अल्लाह सबसे जल्द बना सकता है होला।*_
_(फतेह मोहम्मद जालंधरी देवबंदी और आशिक इलाही देवबंदी)_
_*❌तर्जमा:- अल्लाह चालों में उनसे भी बढ़ा हुआ है।*_
_(अब्दुल माजिद दरियाबादी देवबंदी)_
_*✅ तर्जमा:- तुम फ्रमा दो अल्लाह की खुफिया तदबीर सबसे जल्द हो जाती है।*_
_(आलाहजरत)_
_*⚠️नोट:- अल्लाह तआला के लिए दगाबाजी, धोखेबाजी, फरेबी, चाल चलने वाला, चालों में तेज, हीला बनाने वाला जैसे अल्फाज़ किसी भी तरह अल्लाह की शान के लायक नहीं ऐसा कहना कुफ है।*_
_*📖पारा-8, सूरह आराफ, आयत-54*_
_*❌तर्जमा:- फिर अल्लाह अर्श पर जा बिराजा।*__(डिप्टी नज़ीर अहमद देवबंदी)_
_*❌तर्जमा:- फिर तख्त पर चढ़ा।*_
_(नवाब वहीदुज्जमाँ, गैर मुकल्लिद)_
_*❌तर्जमा:- फिर कायम हुआ तख्त पर।*__(आशिक इलाही देवबंदी)_
_*✅तर्जमा:- फिर अर्श पर इस्तवा फरमाया जैसी उसकी शान के लायक है|*_
_(आलाहज़रत)_
_*📖पारा-1, सूरह बकरा, आयत-11*_
_*❌ तर्जमा:- इधर अल्लाह ही का रूख है।*__(अशरफ अली थानवी और आशिक इलाही देवबंदी)_
_*❌तर्जमा:- उधर अल्लाह का सामना है*__(डिप्टी नजीर अहमद देवबंदी)_
_*✅ तर्जमा:- तो तुम जिधर मुँह करो वहुल्लाह है।*__(आलाहज़रत)_
_*⚠️नोट- देवबंदियों ने अल्लाह के लिए उठना, बैठना, चढ़ना, रूख करना, सामना होना जैसे लफ्ज़ लिखकर अल्लाह के लिए जिस्म साबित कर डाला जो कुफ है। जबकि अल्लाह जिस्म और जिस्मानियत से पाक है।*_
_*📖"या अय्युहन्नबिय्यु" पारा-10 सूरह इंफाल, आयत-64*_
_*❌ तर्जमा:- ऐ नबी*_
_(अब्दुल माजिद और अशरफ अली थानवी देवबंदी)_
_*❌ तर्जमा:- ऐ पैगम्बर*_
_(डिप्टी नज़ीर अहमद और शाह वली उल्लाह)_
_*✅ तर्जमा:- ऐ गैब की खबरे बताने वाले*__(आलाहज़रत)_
_*⚠️नोट- कुरआन मजीद में लफ्ज़ 'रसूल' और 'नबी' कई बार आया है। इसलिए तर्जमा करने वालों की जिम्मेदारी है कि वो लफ्ज़ रसूल' और 'नबी' का भी तर्जमा करें। रसूल का तर्जमा 'पैगम्बर को सभी जानते हैं लेकिन नबी का तर्जमा भी पैगम्बर कर दिया जाए तो सवाल ये पैदा होता है कि अल्लाह ने कुरआन में लफ्ज़ 'नबी' क्यूँ फरमाया। अल्लाह चाहता तो पूरी कुरआन में सिर्फ रसूल ही फरमाता। तो मुसलमानो जान लो कि गैबी (छुपी) बात बताने के लिए ही नबी भेजे जाते हैं।*_
_*✒️अब कुरबान जाइए आलाहज़रत के इश्के रसूल पर कि सरकारे दो आलम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की सच्चाई बता दी। आलाहज़रत के इस सही तर्जमें से कई देवबंदियों को "हार्ट अटैक" पड़ गया क्योंकि देवबंदियों का तो यह अकीदा है कि "नबी को दीवार के पीछे का भी इल्म नहीं' और अगर देवबंदी नबी का तर्जमा “गैब की खबरें बताने वाले" कर देते तो बेचारे देवबंदी खुद अपने ही बुने जाल में फँस जाते इसलिए लफ्ज़ 'नबी का तर्जमा जान बूझकर नहीं किया देवबंदियों ने।*_
_*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम का तर्जमा*_
_*❌ तर्जमा:- शुरू अल्लाह निहायत रहम करने वाले बार-बार रहम करने वाले के नाम से।*__(अब्दुल माजिद दरियाबादी देवबंदी)_
_*❌ तर्जमा:- शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़े मेहरबान निहायत रहम करने वाले हैं*__(अशरफ अली थानवी देवबंदी)_
_*✅ तर्जमा:- अल्लाह के नाम से शुरू जो निहायत मेहरबान रहमत वाला।*_
_(आलाहज़रत)_
_*⚠️नोट- मुसलमानो ध्यान दो कि आलाहज़रत ने अल्लाह के नाम से शुरू किया जबकि देवबंदियों ने शुरू करता हूँ से शुरू किया अल्लाह के नाम से शुरू नहीं किया इसलिए देवबंदियों का तर्जमा गलत है और अशरफ अली थानवी ने आखिर में "हैं" बढ़ा दिया। अब थानवी साहब ही बताएँ कि हैं। किस लफ्ज़ का तर्जमा है।*_
_*⚠️नोट- देवबंदियों से ज्यादा गंदी इनकी किताबें हैं, इसलिए किताब खरीदते समय बिस्मिल्लाह के तर्जमा पर ध्यान दें। अगर किताब में तर्जमा नहीं दिया तो दुकानदार से पूछ लें कि सुन्नियों की किताब है या देवबंदियों की।*_
_*⚠️नोट- अगर आपको देवबंदियों की तर्जमें वाली कुरआन मिले तो ऊपर बताई गई गलतियों को ढूँढकर सही कर दें ताकि कोई दूसरा गलत ना पढ़े।*_
_*👉"अगर अहले सुन्नत वल जमात से हो तो अहले सुन्नत वल जमात के मुताबिक अमल करो मसलक ए आला हज़रत के मुताबिक अपनी ज़िन्दगी गुज़ारो ये वहाबी देवबंदी सुकहकुल्ली गैर मुकल्लिद शिया से मिलकर कौम को क्या पैगाम देना चाहते हो अगर मसलक के वफादार हो तो ऐसे लोगों से बचो वरना ऐसे लोगों का बायकॉट किया जाएगा*_
_*👉सुलहकुल्ली नबी का नहीं सुन्नियों सुन्नी मुस्लिम है सच्चा नबी के लिए*_
_*👉मसलक ए आला हज़रत पर क़ायम रहो ज़िन्दगी दी गई है इसी के लिए*_
_*📮इन्शा अल्लाहुर्रहमान पोस्ट जारी रहेगी..*_

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