❌इकामत में पहले खड़े होने की बीमारी*_

 ❌इकामत में पहले खड़े होने की बीमारी*_
_*✒️आज वहाबियों/ देवबंदियों के इस फितने की वजह से मस्जिदों के अन्दर लड़ाई मची है कि जब इकामत कही जाती है तो कुछ लोग बैठे हैं तो कुछ लोग खड़े हैं। देवबंदियत के जाल में फंसे बेवकूफ देवबंदी बैठे हुए सुन्नियों को घूरते हैं और सुन्नी इन जाहिल देवबंदियों को घूरते हैं गोया कि एक रस्साकशी का माहौल बन जाता है। अखिर सच्चाई क्या है ?*_
_*इकामत में हय्यअललफलाह पर खड़े होने का सुबूत👇*_
_*✒️पहला सुबूत:- आका ﷺ फरमाते है जब इकामत कही जाए तो मत खड़े हो यहाँ तक कि मुझे देख लो।*_
_*📕हवाला-बुखारी शरीफ, जिल्द 1 पेज नं. 88*_
_*✒️दूसरा सुबूत:- यह हदीस मिश्कात शरीफ के जिल्द 1 पेज 67 पर है।*_
_*✒️तीसरा सुबूत:- यही हदीस मुस्लिम शरीफ जिल्द 1. पेज 220 पर है।*_
_*✒️चौथा सुबूत:- मुस्लिम शरीफ की इस हदीस की शरह में इमाम नूई अलैहिर्रहमा फरमाते हैं यानी इमामे आज़म (अबू हनीफा) और उलमाए कौफ ने फरमाया कि जब हय्यअलस्सलाह कहे तब सब लोग खड़े हों।*_
_*📕हवाला- नूई शरीफ, पेज नं. 221*_
_*✒️पाँचवा सुबूत:- मुल्ला अली कारी लिखते हैं कि हमारे अइम्मये कराम हजरत इमामे आज़म अबू हनीफा, इमाम अबू यूसुफ और इमाम मुहम्मद रहमतुल्लाहि तआला अलैह ने फरमाया कि इमाम और मुक्तदी हय्यअलस्सलाह के वक्त खड़े हों।*_
_*📕हवाला- मिरकात शरह मिश्कात, जिल्द 1, पेज 419*_
_*✒️छठा सुबूत:- मोअज़्जिन जिस वक्त हय्यअललफलाह कहे तब इमाम और मुकतदियों को खड़ा होना चाहिए।*_
_*📕हवाला- फतावा आलमगीरी, जिल्द 1, पेज नं. 58*_
_*✒️सातवाँ सुबूत:- उसके लिए खड़े होकर इन्तिज़ार करना मकरूह है। बल्कि बैठ जायें फिर जब मुअज्जिन हय्यअललफलाह कहे तो उठे।*_
_*📕हवाला- शामी शरीफ, जिल्द 1, पेज नं. 268*_
_*✒️आठवाँ सुबूत:- हज़रत इमाम मुहम्मद शैबानी रजिअल्लाहु तआला अन्हो फरमाते हैं कि तकबीर कहने वाला जब हय्यअललफलाह पर पहुंचे तो मुक्तदियों को चाहिए कि नमाज़ के लिए खड़े हों और फिर सफबंदी करते हुए सफें को सीधी करें।*_
_*📕हवाला- मुवत्ता इमाम मुहम्मद बाबु तस्वियतिस्सफ, पेज नं. 88*_
_*✒️नौवाँ सुबूत:- इमाम और मुक्तदी का हय्यअललफलाह के वक्त खड़ा होना सुन्नते मुस्तहब्बा है।*_
_*📕हवाला-दर्रे मुख्तार मए रहुलमुहतार जिल्द 1, पेज 322*_
_*✒️दसवाँ सुबूत:- इमाम और मुक्तदी हय्यअलस्सलाह कहने के वक्त खड़े हों।*_
_*📕हवाला- शरह बका, जिल्द 1, पेज नं. 136*_
_*✒️ग्यारहवाँ सुबूत:- और खड़े होना उस वक्त है जब हय्यअललफलाह कहा जाए।*_
_*📕हवाला- नूरूल यजाह, पेज नं. 74*_
_*✒️बारहवाँ सुबूत:- शेख मुहद्दिस देहलवी रहमतुल्लाह अलैह लिखते हैं कि "फुकहाये कराम ने फरमाया मज़हब यह है कि हय्यअलस्सलाह के वक्त उठना चाहिए।*_
_*📕हवाला- अशिअतुल्लमआत, जिल्द 1, पेज नं. 321*_
_*⚠️नोट- कुछ किताबों में हय्यअलस्सलाह और कुछ में हय्यअललफलाह पर उठने का हुक्म है तो हय्यअलस्सलाह के आखिर में उठे और हय्यअललफलाह के शुरू में सीधे खड़े हो जाए इस तरह दोनो कौल पर अमल हो जाएगा।*_
_*📕हवाला- फतावा रज़विया, जिल्द 2, पेज नं. 472*_
_*🔥देवबंदियों के यहाँ से तेरहवाँ सुबूत:- देवबंदी मुफ्ती अब्दुल रहीम लिखते हैं। "इकामत के वक्त कोई शख्स मस्जिद में आये तो खड़े-खड़े इकामत या इमाम का इन्तेज़ार करना मकरूह है, अगर ईमाम मेहराब के पास है तो हय्यअललफलाह के वक्त खड़े होना मुस्तहब (अच्छा) है।*_
_*📕हवाला- फतावा रहीमिया, जि0 4, पेज न0 288, नासिर मक्तबा रहीमिया*_
_*🔥देवबंदियों के यहाँ से चौदहवां सुबूत:- देवबंदियों के रहनुमा मौलवी करामत अली लिखते हैं "और जब इकामत में हय्यअलस्सलाह कहे तब इमाम और सब लोग खड़े हो जाएं"।*_
_*📕हवाला-मुफ्ताह अल जमात, पेज नं. 45*_
_*👉"अगर अहले सुन्नत वल जमात से हो तो अहले सुन्नत वल जमात के मुताबिक अमल करो मसलक ए आला हज़रत के मुताबिक अपनी ज़िन्दगी गुज़ारो ये वहाबी देवबंदी सुकहकुल्ली गैर मुकल्लिद शिया से मिलकर कौम को क्या पैगाम देना चाहते हो अगर मसलक के वफादार हो तो ऐसे लोगों से बचो वरना ऐसे लोगों का बायकॉट किया जाएगा*_
_*👉सुलहकुल्ली नबी का नहीं सुन्नियों सुन्नी मुस्लिम है सच्चा नबी के लिए*_
_*👉मसलक ए आला हज़रत पर क़ायम रहो ज़िन्दगी दी गई है इसी के लिए*_
_*📮इन्शा अल्लाहुर्रहमान पोस्ट जारी रहेगी..*_

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