*नबी को "हम जैसे बशर' बोलने की बीमारी*

*"मुसलमानो! हक पहचानो!"*_                         *🔖पोस्ट नम्बर 17*_   
  _*नबी को "हम जैसे बशर' बोलने की बीमारी*_
_*🔥आज वहाबियों/  देवबंदियों/ तबलीगियों की वजह से ये बीमारी आम हो चुकी है कि जिसे बोलने का भी शऊर नहीं वो भी बोल देता है कि रसूलुल्लाह हमारी तरह बशर थे। ज्यादा से ज्यादा ऐसे हैं जैसे हमारे बड़े भैय्या। नबी को बस इतनी इज्जत दो जैसे बड़े भाई को देते हो। या नबी को इस तरह समझो जैसे किसी गाँव का चौधरी। मुसलमानो, ये तो थी देवबंदियों, वहाबियों, तबलीगियों की नापाक जहनियत।।*_
_*✒️क्या है सुन्नी मुसलमानो का अकीदा नबी और रसूल के बारे में ?*_
_*✒️नबी इन्सान ही होते हैं। मर्द (Male) को नबी बनाया जाता है। जिन्न, फरिश्ते. औरत में से कोई नबी नही बन सकता।*_
_*✒️अल्लाह ने नबी को इन्सानों के बीच इन्सानी शक्ल सूरत में ही भेजा है। लेकिन नबी का दर्जा आम इन्सानों से बहुत ऊँचा है इसलिए नबी को आम बोल चाल में बड़े भाई या हम जैसा बशर या गाँव का चौधरी कहना शैतान इबलीस का तरीका है।*_ 
_*✒️इसी तरह यह कहना कि "हममे और पैगम्बर में क्या फर्क है, हम भी बशर वो भी बशर बल्कि हम तो जिन्दा हैं लेकिन वो तो मर कर मिट्टी में मिल गए" (माअजल्लाह) जैसे अल्फाज़ बोलना नबी की शान में खुली गुस्ताखी है।*_
_*✒️सवाल:- नबी को "हम जैसे बशर हमेशा क्यों बोलते हैं ये देवबंदी और तबलीगी जमाअत वाले.?*_
_*✒️जवाब:-  देवबंदी अपनी इस बात को साबित करने के लिए कुरआन की इस आयत का हवाला देते हैं*_
                 *قُلْ إِنَّمَآ أَنَا۠ بَشَرٌ مِّثْلُكُمْ*
_*📕सूरह 18 अल कहफ़ अयत 110*_
_*📜तर्जमा:- ऐ महबूब फरमा दो कि मै तुम जैसा बशर हूँ। फिर ये कहेगें देखो आयत से मालूम पड़ा कि नबी भी हमारे जैसे बशर हैं।*_
_*✒️मुसलमानो, जानलो कि देवबंदियों/ तबलीगियों की जात एक चालाक लोमड़ी की तरह होती है। इन्होंने आपको आयत तो बता दिया पर इससे जुड़ी तीन बातों को नहीं बताया। आइए देखें कि वो तीन बातें कौन सी हैं।*_
_*✒️पहली बात:- ये आयत आधी है। "मिस्लुकुम के बाद "यूहा इलैया की कैद लगी है जिसकी तफसीर ये देवबंदी नहीं बताते हैं।*_
_*✒️दूसरी बात:- ये आयत काफिरों के लिए है ना कि मुसलमानों के लिए क्योंकि नबी करीम सलल्लाहो अलैहि वसल्लम के जमाने के काफिर, हुजूर को जादूगर समझते थे और डरते थे इसलिए अल्लाह ने हुजूर को इजाजत दी कि जब आप काफिरों से बात करें तो इस तरह कह सकते हैं कि ऐ लोगों तुम मुझसे घबराओ नही मैं भी तुम्हारी तरह हूँ यानी बशर हूँ।*_
_*✒️तीसरी बात:- इस आयत में अल्लाह फरमाता है "ऐ महबूब तुम फरमा दो" इस जुमले (वाक्य) में अल्लाह तआला सिर्फ हुजूर को इजाज़त दे रहा है कि आप खुद अपने बारे में ऐसा कह सकते हैं। इस आयत में अल्लाह ने यह नही फरमाया कि "ऐ लोगो तुम भी ऐसा कहा करो"।*_
_*✒️सुन्नी मुसलमान भाइयों, अल्लाह तआला ने पूरी कुरआन में अपने महबूब को अच्छे नामों से पुकारा है जैसे- या अय्युहन्नबीयु, या अय्युहर्रसूलु, या अय्युहल मुदस्सिर कहा लेकिन हुजूर का नाम जैसे "या मोहम्मद लेकर नही पुकारा तो फिर हम गुनहगार लोग ये बोल भी कैसे सकते हैं कि हुजूर जैसे बड़े भैय्या या गाँव के चौधरी।*_
_*✒️ऐ मुसलमानो आप जानते हैं कि अगर कोई अपनी माँ को कहे कि यह मेरे बाप की बीवी है। ऐसा कहना यकीनन गुस्ताखी कहलाएगी हालाँकि अकलन उसने सही कहा है।*_
_*✒️अल्लाह कुरआन में फरमाता है "रसूल के पुकारने को आपस में ऐसा न ठहराओ जैसा कि तुम एक दूसरे को पुकारते हो।"*_
_*📕पारा-8, रूकूअ-15*_
_*✒️अब मुसलमान भाइयो आप खुद ही फैसला करें कि आप अल्लाह की बात मानेगें या इन मुर्तद देवबंदियों/ तबलीगी जमाअत वालों की बात मानेगें।*_
_*👉"अगर अहले सुन्नत वल जमात से हो तो अहले सुन्नत वल जमात के मुताबिक अमल करो मसलक ए आला हज़रत के मुताबिक अपनी ज़िन्दगी गुज़ारो ये वहाबी देवबंदी सुकहकुल्ली गैर मुकल्लिद शिया से मिलकर कौम को क्या पैगाम देना चाहते हो अगर मसलक के वफादार हो तो ऐसे लोगों से बचो वरना ऐसे लोगों का बायकॉट किया जाएगा*_
_*👉सुलहकुल्ली नबी का नहीं सुन्नियों सुन्नी मुस्लिम है सच्चा नबी के लिए*_
_*👉मसलक ए आला हज़रत पर क़ायम रहो ज़िन्दगी दी गई है इसी के लिए*_
_*📮इन्शा अल्लाहुर्रहमान पोस्ट जारी रहेगी..*_

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