हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम पहाड से ऊंटनी पैदा करे मौत का वकत पहले से बता दे ये दिन हैं किसी नबी के इलम पर इतराज गुमराही हैं :-

 हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम पहाड से ऊंटनी पैदा करे मौत का वकत पहले से बता दे ये दिन हैं किसी नबी के इलम पर इतराज गुमराही हैं :-

 *सूरए अअराफ़ – दसवाँ रूकू* 

अल्लाह के नाम से शुरू जो बहुत मेहरबान रहमत वाला और समूद की तरफ़ (1) उनकी बिरादरी से सालेह को भेजा, कहा ऐ मेरी क़ौम अल्लाह को पूजो उसके सिवा तुम्हारा कोई मअबूद नहीं बेशक तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ़ से (2) रौशन दलील आई (3)यह अल्लाह का नाक़ा (ऊंटनी) है (4)तुम्हारे लिये निशानी तो इसे छोड़ दो कि अल्लाह की ज़मीन में खाए और इसे बुराई से हाथ न लगाओ (5)कि तुम्हें दर्दनाक अज़ाब आएगा {73} और याद करो (6)जब तुमको आद का जानशीन किया और मुल्क में जगह दी कि नर्म ज़मीन मे महल बनाते हो (7)और पहाड़ों में मकान तराशते हो(8)तो अल्लाह की नेअमतें याद करो(9)और ज़मीन में फ़साद मचाते न फिरो{74} उसकी क़ौम के घमण्डी कमज़ोर मुसलमानों से बोले क्या तुम जानते हो कि सालेह अपने रब के रसूल हैं बोले वह जो कुछ लेकर भेजे गए हम उसपर ईमान रखते हैं (10){75}घमण्डी बोले जिसपर तुम ईमान लाए हमें उससे इन्कार है {76) फिर (11)नाक़े की कूंचें काट दीं और अपने रब के हुक्म से सरकशी की और बोले ऐ सालेह हमपर ले आओ (12) जिसका तुम वादा कर रहे हो अगर तुम रसूल हो {77} तो उन्हें ज़लज़ले ने आलिया तो सुबह को अपने घरो में औंधे पड़े रह गए {78} तो सालेह ने उनसे मुंह फेरा (13)और कहा ऐ मेरी क़ौम बेशक मैं ने तुम्हें अपने रब की रिसालत (संदेश) पहुंचा दी और तुम्हारा भला चाहा मगर तुम भला चाहने चाहने वालों के ग़र्ज़ी (पसन्द करने वाले) ही नहीं {79} और लूत को भेजा (14) जब उसने अपनी क़ौम से क्या यह वह बेहयाई करते हो जो तुम से पहले जगत में किसी ने न की {80} तो मर्दों  के पास शहवत (वासना) से जाते हो (15)औरतें छोड़कर बल्कि तुम लोग हद से गुज़र गए (16){81}और उसकी क़ौम का कुछ जवाब न था मगर यही कहना कि उन (17) को अपनी बस्ती से निकाल दो ये लोग तो पाकीज़गी (पवित्रता) चाहते हैं (18){82}तो हमने उसे (19)और उसके घरवालों को छुटकारा दिया मगर उसकी औरत वह रह जाने वालों में हुई (20){83} *सूरए अअराफ़ – दसवाँ रूकू* (1) जो हिजाज़ और शाम के बीच सरज़मीने हजर में रहते थे (2) मेरी नबुव्वत की सच्चाई पर.(3) जिसका बयान यह है कि (4) जो न किसी पीठ में रही न किसी पेट में. न किसी नर से पैदा हुई, न मादा से, न गर्भ में रही न उसकी उत्पत्ति दर्जा ब दर्जा पूरी हुई, बल्कि आद के तरीक़े के ख़िलाफ़ वह पहाड़ के एक पत्थर से यकायक पैदा हुई. उसकी यह पैदायश चमत्कार है. वह एक दिन पानी पीती है और तमाम समूद सम्प्रदाय एक दिन. यह भी एक चमत्कार है कि एक ऊंटनी एक क़बीले के बराबर पी जाए. इसके अलावा उसके पीने के रोज़ उसका दूध दोहा जाता था और वह इतना होता था कि सारे क़बीले को काफ़ी हो और पानी की जगह ले ले. यह भी चमत्कार. और तमाम वहशी जानवर और हैवानत उसकी बारी के रोज़ पानी पीने से रूके रहते थे. यह भी चमत्कार. इतने चमत्कार हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम के सच्चे नबी होने की खुली दलीलें हैं.(5) न मारो, न हंकाओ,अगर ऐसा किया तो यही नतीजा होगा.(6) ऐ समूद क़ौम.(7) गर्मी के मौसम में आराम करने के लिये.(8) सर्दी के मौसम के लिये.(9) और उसका शुक्र बजा लाओ.(10) उनके दीन को क़ूबूल करते हैं, उनकी रिसालत को मानते हैं.(11) समूद क़ौम ने.(12) वह अज़ाब (13) जब कि उन्होंने सरकशी की. नक़ल है कि इन लोगों ने बुध को ऊंटनी की कूँचें काटी थीं तो हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया कि तुम इसके बाद तीन दिन ज़िन्दा रहोगे. पहले रोज़ तुम्हारे सब के चेहरे पीले हो जाएंगे, दूसरे रोज़ लाल और तीसरे रोज़ काले. चौथे दिन अज़ाब आएगा. चुनांचे ऐसा ही हुआ, और इतवार को दोपहर के क़रीब आसमान से एक भयानक आवाज़ आई जिससे उन लोगों के दिल फट गए और सब हलाक हो गए.(14) जो हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के भतीजे हैं, आप सदूम वालों की तरफ़ भेजे गए और जब आपके चाचा हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने शाम की तरफ़ हिजरत की तो हज़रत इब्राहीम ने सरज़मीने फ़लस्तीन में नुज़ूल फ़रमाया और हज़रत लूत अलैहिस्सलाम उरदुन में उतरे. अल्लाह तआला ने आपको समूद निवासियों की तरफ़ भेजा. आप उन लोगों को सच्चे दीन की तरफ़ बुलाते थे और बुरे काम से रोकते थे, जैसा कि आयत में ज़िक्र आता है.(15) यानी उनके साथ बुरा काम करते हो.(16) कि हलाल को छोड़कर हराम में पड़ गए और ऐसे ख़बीस और बुरे काम को अपनाया. इन्सान को जिन्सी जोश या काम वासना नस्ल मेहफूज़ रखने और दुनिया की आबादी के लिये दी गई है और औरतों को इसका साधन बनाया गया है कि उनसे जाने पहचाने तरीक़े से शरीअत की सीमाओं में रहकर औलाद हासिल की जाए. जब आदमियों ने औरतों को छोड़कर उनका काम मर्दों से लेना चाहा तो वह हद से गुज़र गए और उन्होंने इस क़ुव्वत के सही उद्देश्य को ख़त्म कर दिया. मर्द को न गर्भ रहता है न वह बच्चा जनता है, तो उसके साथ हमबिस्तरी करना शैतानी काम के सिवा और क्या है. उलमा का बयान है कि लूत क़ौम की बस्तियाँ बहुत ही हरी भरी और तरो ताज़ा थीं और वहाँ ग़ल्ले और फल कसरत से पैदा होते थे.दुनिया का दूसरा क्षेत्र इसके बराबर न था. इसलिये जगह जगह से लोग यहाँ आते थे और उन्हें परेशान करते थे. ऐसे वक़्त में इब्लीस लईन एक बूढे की सूरत में ज़ाहिर हुआ और उनसे कहने लगा कि अगर तुम मेहमानों की इस बहुतात से छुटकारा चाहते हो तो जब वो लोग आएं तो उनके साथ बुरा काम करो. इस तरह यह बुरा काम उन्होंने शैतानों से सीखा और उनके यहाँ इसका चलन हुआ (17) यानी हज़रत लूत और उनके मानने वाले.(18) और पाकीज़गी ही अच्छी होती है. वही सराहनीय है. लेकिन इस क़ौम का स्तर इतना गिर गया था कि उन्होंने पाकीज़गी जैसी सराहनीय विशेषता को ऐब क़रार दिया.(19) यानी हज़रत लूत अलैहिस्सलाम को (20) वह काफ़िरा थी और उसी क़ौम से महब्बत रखती थी.(21) अजीब तरह का, जिसमें ऐसे पत्थर बरसे कि गन्धक और आग से बने थे. एक क़ौल यह है कि बस्ती में रहने वाले, जो वहाँ ठहरे हुए थे, वो तो ज़मीन में धंसा दिये गए और जो सफ़र में थे वो इस बारिश से हलाक कर दिये गए.(22) मुजाहिद ने कहा कि हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम उतरे और उन्होंने अपना बाज़ू लूत क़ौम की बस्तियों के नीचे डाल कर उस टुकड़े को उखाड़ लिया और आसमान के क़रीब पहुंचकर उसको औंधा करके गिरा दिया. इसके बाद पत्थरों की बारिश की गई

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